नवीन नवाज, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और हिंसा के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई का असर अब आंकड़ों में भी साफ दिखाई देने लगा है।
नीति आयोग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018 से 2025 के बीच पथराव की घटनाओं में 98.6 प्रतिशत की भारी कमी आई है। इसी अवधि में आतंकवाद में युवाओं की भर्ती के मामलों में करीब 99 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। आतंकी घटनाओं, मुठभेड़ों, आतंकियों के मारे जाने और सुरक्षा बलों के बलिदान के मामलों में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
नीति आयोग ने कानून-व्यवस्था और सुरक्षा स्थिति से जुड़े प्रमुख संकेतकों की वर्ष 2018 और 2025 के आंकड़ों के आधार पर तुलना की है। इसके मुताबिक, 2018 में जम्मू-कश्मीर में पथराव की 1,767 घटनाएं हुई थीं। 2025 में यह संख्या घटकर महज 25 रह गई। इस तरह आठ वर्ष में पथराव की घटनाओं में 98.6 प्रतिशत की कमी आई।