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सिंधु जल संधि पर परमानेंट कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन का पाकिस्तान के पक्ष में फ़ैसला, भारत पर क्या असर?

1 दिन पहले

सिंधु जल संधि पर परमानेंट कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन का पाकिस्तान के पक्ष में फ़ैसला, भारत पर क्या असर?
नीदरलैंड्स के द हेग स्थित पर कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन (पीसीए) ने कहा है कि भारत को पाकिस्तान के साथ जल बँटवारे की संधि का पालन करना चाहिए.

भारत ने इसे पिछले साल द्विपक्षीय तनाव के बीच निलंबित कर दिया था. कोर्ट ने कहा कि भारत को जम्मू-कश्मीर में बनाए जा रहे एक पनबिजली संयंत्र पर अपने काम को सीमित करना चाहिए.

यह एक इंटरगवर्नमेंटल संगठन है, जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय को वैकल्पिक विवाद समाधान सेवाएं देता है. पीसीए के नियमों का इस्तेमाल मध्यस्थता और सुलह की कार्यवाहियों के साथ-साथ जांच आयोगों में भी किया जा सकता है.

ऐसे में पीसीए के इस फ़ैसले को भारत के हक़ में तो नहीं देखा जा सकता है.

लेकिन दूसरी बात यह भी कही जा रही है कि अंतरराष्ट्रीय संगठनों के फ़ैसले देश सिलेक्टिव तरीक़े से करते हैं और मौजूदा दौर में इनकी प्रासंगिकता पर कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं.

भारत ने पिछले साल उस संधि को निलंबित कर दिया था, जो पाकिस्तान के 80% कृषि क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करती है. भारत ने यह क़दम कश्मीर के एक पर्यटन स्थल पर हुए हमले में शामिल तीन हमलावरों में से दो को पाकिस्तानी नागरिक बताए जाने के बाद उठाया गया था. इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी.

पाकिस्तान ने हमले में किसी भी भूमिका से इनकार किया था और भारत की ओर से जलाशय क्षमता बढ़ाने के लिए कश्मीर में दो पनबिजली परियोजनाओं पर काम शुरू किए जाने के बाद क़ानूनी कार्रवाई की थी.
इसे भारत की ओर से सिंधु जल संधि के तहत आने वाले समझौतों से बाहर जाकर काम करने की दिशा में पहला ठोस क़दम माना गया था. दोनों देशों ने 1960 से अब तक तीन युद्धों और कई अन्य संघर्षों के बावजूद इस संधि का पालन किया है.
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