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खदानों में भरा पानी, इलेक्ट्रिसिटी की डिमांड हाई... देश के बिजली घरों में कितने दिन का कोयला बचा?

2 घंटे पहले

मानसून की लंबी बारिश से देश के ताप बिजली संयंत्रों में कोयले का स्टॉक घटकर सिर्फ नौ दिनों का रह गया है, जबकि बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर है
खदानों में भरा पानी, इलेक्ट्रिसिटी की डिमांड हाई... देश के बिजली घरों में कितने दिन का कोयला बचा?

अगले हफ्ते से बिजली संयंत्रों के पास ज्यादा कोयला पहुंचने लगेगा

नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में मानसून के दौरान लंबी बारिश ने कोयला उत्पादन को प्रभावित किया है। दो महीने पहले ताप बिजली संयंत्रों के पास 17 दिनों का औसतन स्टॉक था जो अब घट कर नौ दिनों का रह गया है।

लेकिन कोयला मंत्रालय का कहना है कि अब पूर्वी-मध्य भारत के कोयला क्षेत्रों में बारिश घटने के साथ कोयला उत्पादन व ढुलाई दोनों तेज होने लगी हैं और इसे और बढ़ाने की तैयारी है। सितंबर के बारिश वाले पहले तीन दिनों में औसत दैनिक उत्पादन करीब 13.6 लाख टन रहा था जो चार सितंबर को यह लगभग 17 लाख टन हो गया है।

कोयला उत्पादन भी घटा

खदान के आस पास जमीन सूख रहे हैं जिससे अगले हफ्ते भर में ढुलाई में और तेजी आएगी और बिजली संयंत्रों के पास ज्यादा कोयला पहुंचने लगेगा। कोयला मंत्रालय व बिजली मंत्रालय के अलग अलग आंकड़ों का आकलन करें तो यह साफ हो जाता है कि जुलाई-अगस्त, 2026 में एक तरफ बिजली की मांग रिकॉर्ड तौर पर ज्यादा रही है जबकि कोयला उत्पादन पिछले साल से कम हो गया है।
लिहाजा ताप बिजली संयंत्रों के पास कोयला भंडार कम हुआ है। सीआईएल अपने कोयला स्टाक (पहले से निकाले गये कोयला) से बिजली संयंत्रों को आपूर्ति बना कर रखे हुए है। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-अगस्त में कंपनी ने 32.29 करोड़ टन कोयला सप्लाई किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के 30.26 करोड़ टन से 6.70 फीसद अधिक है।

बिजली की रिकॉर्ड खपत

अगस्त 2026 में 6 करोड़ टन कोयला की आपूर्ति की गई है जो पिछले अगस्त से 5.50 फीसद ज्यादा। बिजली क्षेत्र को अगस्त में 4.485 करोड़ टन कोयला दिया गया जो पिछले साल के मुकाबले 4.5 फीसद अधिक है। जबकि सीआईएल का कहना है कि कोयला उत्पादन में अगस्त, 2026 में पिछले साल के मुकाबले 5.6 फीसद घट कर 4.75 करोड़ टन रह गई है।

जुलाई, 2025 व अगस्त, 2025 में कोयला उत्पादन में क्रमशः आठ फीसद व 11.8 फीसद वृद्धि हुई थी। दूसरी तरफ, जुलाई, 2026 में देश में बिजली की खपत 270.30 लाख मेगावाट तक गई है जो तकरीबन 11 फीसद ज्यादा है। इसी तरह से अगस्त, 2026 खपत 258.27 लाख मेगावाट तक गई है जो 12.85 फीसद ज्यादा है। यह मानसून के महीनों में बिजली की रिकॉर्ड खपत है।

कोयला खदानों में जलभराव

मंत्रालय का कहना है कि मानसून की वजह से कोयला खदानों में जलभराव है, खदानों को जोड़ने वालें आंतरिक सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और हैंडलिंग प्लांट से कोयला निकालना मुश्किल हो गया। कोल इंडिया लिमिेड (सीआईएल) ने सप्लाई को पूरी तरह से टूटने नहीं दिया है। इसके बावजूद आंकड़ों से साफ है कि पिछले मानसून के अगस्त में सीआईएल का उत्पादन इस अगस्त से बेहतर था।

सरकार का कहना है कि कोल इंडिया के खदानों के बार 7.6 करोड़ टन स्टाक है जबकि 4.6 करोड़ टन अलग से एक स्टॉक भी तैयार है। खदानों में गीलापन कम होने के बाद तेजी से कोयला निकालने का काम तेज किया जा रहा है। बिजली संयंत्रों को वार्षिक अनुबंध से ज्यादा कोयला लेने की छूट दी गई है।

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