नई दिल्ली। 22 हजार करोड़ रूपये के देनदारी साढ़े छह करोड़ में खत्म करने को लेकर चर्चा में आए एसेल ग्रुप के मालिक सुभाष चंद्रा के खिलाफ सीबीआई का शिकंजा कस गया है। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस की शिकायत पर सीबीआई ने चंद्रा और एसेल ग्रुप की कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया है।
एनसीएलटी के फैसले के बाद दर्ज की गई शिकायत में सुभाष चंद्रा और एसेल ग्रुप की तीन कंपनियों, उनके निदेशकों पर 1322 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। एफआईआर में अज्ञात सरकारी अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है।
एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस द्वारा की गई शिकायत में सुभाष चंद्रा के विदेश भागने की भी आशंका जताई गई है। इसमें एफआईआर दर्ज करने की जरूरत बताते हुए कहा गया है कि आरोपित कई बार सार्वजनिक रूप से भारत छोड़ने की मंशा जता चुका है।
इसीलिए सीबीआई जल्द से जल्द पूरे मामले में लोन की रकम के असली लाभार्थी और उसमें शामिल आरोपितों के खिलाफ सबूत जुटाकर कार्रवाई करे। एफआईआर सीबीआई के दिल्ली मुख्यालय में स्थित बैंकिंग एंड सिक्यूरिटी फ्राड डिविजन में दर्ज किया गया है।
सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर
27 अगस्त को एनसीएलटी के फैसले के चार दिन बाद 31 अगस्त को एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने शिकायत की और सीबीआई ने उसी दिन एफआईआर दर्ज कर ली। माना जा रहा है कि जल्द ही इस मामले में सुभाष चंद्रा समेत सभी आरोपियों से जल्द ही पूछताछ शुरू की जाएगी।
एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस की शिकायत के अनुसार 500 करोड़ और 480 करोड़ लोन की सुविधा के लिए सुभाष चंद्रा ने व्यक्तिगत गारंटी थी। इस सिलसिले में जमा किए गए नेटवर्थ सर्टिफिकेट में उनकी नेटवर्थ लगभग 59,113 करोड़ दिखाई गई थी, जबकि दूसरे में 40,562 करोड़ दिखाई गई थी। लेकिन बाद में व्यक्तिगत दिवालिया कार्यवाही के दौरान चंद्रा ने इस नेटवर्थ होने से इनकार किया और 2024 में केवल 31.79 करोड़ की नेटवर्थ बताई।
लोन को मंजूर करने और वितरित करने के लिए प्रेरित करने के लिए पहले के सर्टिफिकेट जमा किए गए थे। इस शिकायत के आधार पर दर्ज मामले में सीबीआई ने चंद्रा पर हजारों करोड़ का नेटवर्थ दिखाने के लिए झूठे दस्तावेज लगाने और लोन की मंजूरी में एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस के तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका जताई है। आखिरकार लगभग एक हजार करोड़ का लोन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कैसे जारी कर दिया गया।
किन कंपनियों पर दर्ज हुआ मामला?
एफआईआर में सुभाष चंद्रा के साथ ही वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड व उसके निदेशक पंकज सुरोलिया, पैन इंडिया इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड व उसके निदेशक अमिश पांड्या, स्पिरिट इंफ्रापावर एंड मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड व उसके निदेशक राजीव ढोलकिया और अज्ञात लोक सेवकों सहित अन्य को नामजद किया गया है।
एक पखवाड़े पहले एनसीएलटी ने सुभाष चंद्रा के 22006 करोड़ (गारंटी सहित अन्य मामलों में) के लोन के बदले 6.5 करोड़ रुपये में दिवालिया मामला सेटल कर दिया था।
विवाद बढ़ा तो पांच सदस्यीय एनसीएलटी ने उस फैसले पर रोक लगा दी थी। हालांकि चंद्रा की ओर से यह सफाई दी जा रही थी कि इसके अलावा अन्य देनदारों पर लगभग 15 हजार करोड़ की देनदारी बरकरार थी।