छत्तीसगढ़ में जगदलपुर की विशेष एनआईए अदालत ने 25 मई 2013 के बहुचर्चित झीरम घाटी हमले में 10 अभियुक्तों को दोषी माना है. इन सभी अभियुक्तों को 16 सितंबर को सज़ा सुनाई जाएगी.
किसी राजनीतिक दल पर माओवादियों के इस सबसे बड़े हमले में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं समेत 28 लोगों की मौत हुई थी और 38 लोग घायल हुए थे.
13 साल तक जगदलपुर की विशेष एनआईए अदालत में चले इस मुदकमे में अभियोजन पक्ष ने 101 गवाह पेश किए और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित करने की कोशिश की.
मामले में कुल 11 अभियुक्त ट्रायल की प्रक्रिया में शामिल थे. सुनवाई के दौरान एक अभियुक्त की मृत्यु हो गई और शेष 10 अभियुक्तों को लेकर फ़ैसला आया.
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पहले से ही फ़ैसले को लेकर आशंका जताई थी और कहा था कि झीरम घाटी हत्याकांड के पीछे के षड्यंत्रकारियों तक पहुंचने के लिए जांच में कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया.
उन्होंने कहा था कि जब जांच ही सही तरीके से नहीं हुई है, तो अदालत का फैसला भी केवल उपलब्ध जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही होगा.
25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में हुआ हमला, भारत में किसी राजनीतिक दल के नेतृत्व पर माओवादियों का अब तक का सबसे बड़ा हमला था.
कांग्रेस की 'परिवर्तन यात्रा' सुकमा से लौट रही थी. उस समय छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार थी और रमन सिंह मुख्यमंत्री थे.