चंडीगढ़। हरियाणा में वर्ष 2023-24 में करों में हेराफेरी से सरकारी खजाने को 999 करोड़ रुपये का ‘फटका’ लग गया। बिक्री कर, मूल्य वर्धित कर (वैट), जमीन की रजिस्ट्री के दौरान स्टांप शुल्क एवं पंजीकरण फीस, उत्पाद शुल्क व परिवहन कर की वसूली के 7144 मामलों में अनियमितताएं साामने आई हैं।
कृषि भूमि के नाम पर 266 आवासीय, वाणिज्यिक या औद्योगिक प्लाटों की रजिस्ट्री कर दी गईं, जिससे सरकारी खजाने को 34 करोड़ रुपये के स्टांप शुल्क का नुकसान हुआ। इन रजिस्ट्रियों में सरकार को 49.60 करोड़ का शुल्क मिल पाया, जबकि मिलने चाहिए थे 83.68 करोड़ रुपये।
नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) द्वारा विधानसभा में रखी गई रिपोर्ट में यह खामियां सामने आई हैं। संबंधित विभागों ने 5769 मामलों में 814 करोड़ रुपये की कम वसूली को स्वीकार भी किया है। क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण पंचकूला में नियंत्रक अधिकारी द्वारा नियमों का पालन न करने से 5.43 करोड़ के सरकारी धन का संदिग्ध दुर्विनियोग हुआ।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत कार्य अनुबंध/निर्माण सेवाओं पर लेखापरीक्षा में छूट और रियायती दरों का गलत लाभ उठाने, अग्रिमों एवं अचल परिसंपत्तियों पर कर का भुगतान न करने तथा ब्याज के कम भुगतान से 389 करोड़ की चपत लगी। इनपुट टैक्स क्रेडिट में 37.69 करोड़ की अनियमितताएं मिली।
कर निर्धारण प्राधिकारी ने वस्तुओं की बिक्री पर लागू कर की दर से कम टैक्स लगाया, जिसके परिणामस्वरूप 3.31 करोड़ के कर और 2.47 करोड़ रुपये के ब्याज की वसूली नहीं हो पाई।