चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में बोलते हुए महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक और अश्लील टिप्पणियों पर कड़ा रुख अपनाया है। दरअसल, अभिनेत्री तृषा पर नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन द्वारा की गई अप्रत्यक्ष अपमानजनक टिप्पणी के कुछ दिनों बाद आई है।
सीएम विजय
ने कहा कि राजनीतिक आलोचना जायज है, लेकिन महिलाओं के खिलाफ दोहरे या तिहरे अर्थ वाली मानहानिकारक भाषा को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी सफलता के पीछे महिलाओं का सबसे बड़ा योगदान है और महिलाओं का अपमान करने वालों के खिलाफ कानून सख्त कार्रवाई करेगा।
स्वतंत्रता हर किसी का व्यक्तिगत अधिकार
सीएम विजय ने विधानसभा में बोलते हुए कहा, "कानून व्यवस्था के संदर्भ में, मैं अपना भाषण समाप्त करने से पहले यह कहना चाहता हूं कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हर किसी का व्यक्तिगत अधिकार है। लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग कैसे किया जाए, इस पर हमें विचार करना होगा। मेरा निवेदन है कि राजनीतिक कारणों से किसी को भी लोगों, महिलाओं और अन्य लोगों को अपमानित नहीं करना चाहिए। यह मेरा आम निवेदन है।
मैं यह इसलिए कह रहा हूं क्योंकि हाल के दिनों में तमिलनाडु में अश्लीलता और दुर्भावना की नदी बह रही है। जो भी महिलाओं के बारे में अपमानजनक, दोहरे और तिहरे अर्थों में बोलता है, लोग उस पर नजर रख रहे हैं। हमारे घरों में भी वही महिलाएं मां और बहन के रूप में मौजूद हैं। बेहतर होगा कि आप इसे ध्यान में रखें और उचित भाषा का प्रयोग करें। मैं सभी से निवेदन करता हूं कि वे महिलाओं के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणी न करें।"
क्या है मामला?
गौरतलब है कि तमिलनाडु विधानसभा में नेत प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन द्वारा कावेरी जल मुद्दे पर तंजावुर में रैली को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान भीड़ ने अभिनेत्री तृषा का नाम लेकर नारेबाजी शुरू की, तब उन्होंने कहा, "पानी कहीं और पहुंचे या न पहुंचे, उसे वहां जरूर पहुंचना चाहिए।"
इस बयान को अभिनेत्री तृषा और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से जोड़ते हुए इसे एक अभद्र और दोहरे अर्थ वाला बयान बताया गया।
इसको लेकर उदयनिधि का कहना है कि उनकी इस टिप्पणी का सीधा संदर्भ कावेरी नदी के पानी से था और उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया था।
विधानसभा की कार्यवाही के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उदयनिधि ने कहा कि मुख्यमंत्री ने डीएमके के खिलाफ बिना सबूत दिए कई आरोप लगाए हैं और दावा किया कि विपक्ष को जवाब देने का अवसर नहीं दिया गया।