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Featured story ‘गूंजा-सा है कोई एकतारा…’ सिर्फ एक शब्द नहीं, सूखी लौकी से बने इस वाद्ययंत्र की दिलचस्प है कहानी

1 घंटे पहले

Featured story ‘गूंजा-सा है कोई एकतारा…’ सिर्फ एक शब्द नहीं, सूखी लौकी से बने इस वाद्ययंत्र की दिलचस्प है कहानी
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। रणबीर कपूर का गाना ‘गूंजा-सा है कोई एकतारा, एकतारा…’ आपने जरूर सुना होगा। ये गाना सुनकर दिल खुश हो जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं इसमें इस्तेमाल होने वाला एकतारा क्या है?

दरअसल, इस गाने में जिस इकतारे की बात हो रही है, वो भारत के सबसे पुराने वाद्य यंत्रों में से एक है। आइए जानें इसका इतिहास क्या है।

क्या है एकतारा का इतिहास?
एकतारा शब्द एक और तार से मिलकर बना है। इसका मतलब होता है एक तार वाला यंत्र। माना जाता है कि एकतारा बजाने की शुरुआत भारत के लोक संगीत और घुमंतू भिक्षुओं ने की थी। प्राचीन काल में घुमंतू गायक, ऋषि-मुनि और संतों को एक ऐसी चीज की जरूरत थी, जिसका वजन हल्का हो और यात्रा के दौरान आसानी से साथ लेकर जाया जा सके। इसी तरह एकतारा का आविष्कार हुआ और संगीत की दुनिया में इसने अपनी जगह बनाई।
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