जालंधर। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने रविवार को जालंधर में कहा कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति में निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है।
चीमा ने कहा कि मेमोरेंडम आफ प्रोसीजर के पैरा नंबर-6 के अनुसार किसी भी हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस की नियुक्ति से पहले संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री की राय और सहमति लेना अनिवार्य है।
उन्होंने दावा किया कि इस मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान से कोई सलाह नहीं ली गई। केंद्र सरकार ने पंजाब के गवर्नर और केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के पत्रों में खुद पैरा-6 का जिक्र किया है, लेकिन इसका पालन नहीं हुआ।
वित्त मंत्री ने एमपी का दिया उदाहरण
वित्त मंत्री ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के सबसे सीनियर जज जस्टिस जीएस संधावालिया का उदाहरण देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 11 जुलाई 2024 को उनका नाम मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के लिए अनुशंसित किया था।
आरोप है कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने दो महीने से अधिक समय तक, 17 सितंबर 2024 तक उनकी फाइल रोक कर रखी और बिना कोई कारण बताए उनकी नियुक्ति में देरी की।
बाद में उनकी नियुक्ति हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में कर दी गई। उन्होंने कहा कि यह पंजाब के साथ सरासर नाइंसाफी है और तब भी अल्पसंख्यको की अनदेखी की गईथी।
तीन करोड़ पंजाबियों का अपमान
चीमा ने कहा कि यह केवल एक जज का मामला नहीं, बल्कि 3 करोड़ पंजाबियों और उनके द्वारा चुने गए मुख्यमंत्री का अपमान है। यह बाबा साहब आंबेडकर के बनाए गए संविधान और फेडरल स्ट्रक्चर पर सीधा हमला है। केंद्र सरकार हमेशा से पंजाब विरोधी फैसले लेती रही है।
उन्होंने बताया कि इस संवेदनशील मुद्दे पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आज शाम 4 बजे पंजाब कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई है, जिसमें इस मामले पर गंभीर चर्चा कर अगला कदम तय किया जाएगा।